Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 795
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1लाली मुसकाईं कह गोविंद राधे।
2धन्य धन्य ठगहार साँवरे बता दे॥ 9243॥
3पुनि मिले लाली लाल गोविंद राधे।
4सखिन कह्यो जय हो जय हो बता दे॥ 9244॥
5एक बार लाली लाल गोविंद राधे।
6बैठे थे कुंज में गलबँहियाँ दे॥ 9245॥
7मणिमय कुंज था गोविंद राधे।
8नाना दर्पण लगे थे बता दे॥ 9246॥
9इतने में शीशे पै गोविंद राधे।
10दृष्टि गई लाली जू की बता दे॥ 9247॥
11लाली ने देखा जब गोविंद राधे।
12दर्पण में प्रतिबिम्ब बता दे॥ 9248॥
13सोचा लाल की यह गोविंद राधे।
14सबते प्रिय प्रेयसी है बता दे॥ 9249॥
15इतनी सुन्दर गोविंद राधे।
16नारि कभु ब्रज में लखी ना बता दे॥ 9250॥
17फिर क्या था लाली जू गोविंद राधे।
18मान करि गइँ मान कुंज बता दे॥ 9251॥
19लाल भये चिंतित गोविंद राधे।
20विस्मित अति ही विकल बता दे॥ 9252॥
21कहाँ हो प्राणप्यारी गोविंद राधे।
22कहाँ हो कहि कहि रोयें बता दे॥ 9253॥
23लाल सोचें मोते गोविंद राधे।
24कौन अपराध हुआ कोउ बता दे॥ 9254॥