Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 792
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1बार बार समुझायो गोविंद राधे।
2तबहूँ न मान्यो दियो डाटि बता दे॥ 9207॥
3अब तो तू ही सखि गोविंद राधे।
4बनु मेरी कर्णधार बता दे॥ 9208॥
5तू जा के लाली को गोविंद राधे।
6समझा दे मिटे मान बता दे॥ 9209॥
7सखी ने कहा लाल गोविंद राधे।
8आपु पधारो कुंज में बता दे॥ 9210॥
9हौं श्री जू को गोविंद राधे।
10विनती करि कुंज ल्यावूँ बता दे॥ 9211॥
11सखी गइ श्यामा ढिग गोविंद राधे।
12कहा चलो श्याम बुलावें बता दे॥ 9212॥
13लाली बोलीं अरी सखि गोविंद राधे।
14हौं नहिं भोरीभारी बता दे॥ 9213॥
15परम चतुर की भी गोविंद राधे।
16चतुराई मैंने जानी बता दे॥ 9214॥
17सखि बोली लाली जू गोविंद राधे।
18वह थी तिहारी परछाईं बता दे॥ 9215॥
19मानिनी ने सखी की गोविंद राधे।
20एक ना सुनी कही चली जा बता दे॥ 9216॥
21सखी गइ श्याम ढिग गोविंद राधे।
22बोली मैं हारि गइ लाल जू बता दे॥ 9217॥
23तुम अब भामिनी को गोविंद राधे।
24भेष बनाय जावो महल बता दे॥ 9218॥