Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 790
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1तुम्हरे मुख मिश्री है गोविंद राधे।
2उर में है भरा जहर बता दे॥ 9183॥
3मोर मिठ बोलनो गोविंद राधे।
4खाये बड़े बड़े नाग बता दे॥ 9184॥
5सौत को धार्यो उर गोविंद राधे।
6रैन दिन छिनहूँ वियोग ना बता दे॥ 9185॥
7मोको दे बार बार गोविंद राधे।
8दारु ण दुःख वियोग को बता दे॥ 9186॥
9लाल कह लाली जू गोविंद राधे।
10आप तो सदा ही करो वहम बता दे॥ 9187॥
11तो सों तो प्यारी कोउ गोविंद राधे।
12थी न तो है न तो होगी बता दे॥ 9188॥
13तोरी सौगंध खाय गोविंद राधे।
14कहूँ साँची साँची बात बता दे॥ 9189॥
15हौं तो हौं भोरो अति गोविंद राधे।
16उर नहिं कछु चतुराई बता दे॥ 9190॥
17इमि कहि लाल ने तो गोविंद राधे।
18लालिहिं पकरो हाथ बता दे॥ 9191॥
19लाली ने झटक दीनो गोविंद राधे।
20कहा जनि बोलो मोते बता दे॥ 9192॥
21जाको बिठायो उर गोविंद राधे।
22वाई को पकरो हाथ बता दे॥ 9193॥
23वाई ते प्यार करो गोविंद राधे।
24रैन दिन छिन छिन गलबँहियाँ दे॥ 9194॥