Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 789
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1नख शिख सौन्दर्य गोविंद राधे।
2पुनि सोरह शंृगार बता दे॥ 9171॥
3नंदकुमार कह गोविंद राधे।
4बार बार बार बलिहार बता दे॥ 9172॥
5यह सुनि लाली ने गोविंद राधे।
6लाल को लगा लिया कण्ठ ते बता दे॥ 9173॥
7लाल के वक्षःस्थल गोविंद राधे।
8कौस्तुभ मणि दिव्य दीप्ति थी बता दे॥ 9174॥
9वामें लख्यो लाली ने गोविंद राधे।
10निज प्रतिबिम्ब भईं चकित बता दे॥ 9175॥
11लाली ने जानी यह गोविंद राधे।
12और कोइ सुन्दरि उर में बता दे॥ 9176॥
13लाली ने सोचा मन गोविंद राधे।
14यह तो है विश्वसुन्दरी बता दे॥ 9177॥
15याको तो लखि मेरो गोविंद राधे।
16मनहूँ ह्वै गयो मुग्ध बता दे॥ 9178॥
17याको है जैसो रूप गोविंद राधे।
18वैसो है शृंगार बता दे॥ 9179॥
19आजु लौं बतायो नहिं गोविंद राधे।
20लँगर ने सौत उर धारे बता दे॥ 9180॥
21इमि सोचि श्यामा जू गोविंद राधे।
22ह्वै गईं उदास रिस भौंह बता दे॥ 9181॥
23उठि बोलीं लाल ते गोविंद राधे।
24आजु खुली तोरी पोल बता दे॥ 9182॥