Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 788
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1श्री जी बोलीं यह गोविंद राधे।
2नागरि नहिं नागरा है बता दे॥ 9159॥
3पुनि मिले दोनों जैसे गोविंद राधे।
4पिघली लाह मिले रंग में बता दे॥ 9160॥
5एक दिन राधा रानी गोविंद राधे।
6सोरहों शृंगार करि बैठीं बता दे॥ 9161॥
7इतने में आये तहँ गोविंद राधे।
8नन्दनन्दन घनश्याम बता दे॥ 9162॥
9श्याम ने कही श्री जू गोविंद राधे।
10आजु तो लगो रति मोहिनी बता दे॥ 9163॥
11सिर पै चन्द्रिका गोविंद राधे।
12मोतिन लर बलिहार बता दे॥ 9164॥
13तनु पै नीलाम्बर गोविंद राधे।
14कंचुकी अरु ण रंग वारी बता दे॥ 9165॥
15नागिनि सी वेणी गोविंद राधे।
16वंदनी ललाट पै चमके बता दे॥ 9166॥
17मोतिन भरी माँग गोविंद राधे।
18कर्ण में ताटंक सोहे बता दे॥ 9167॥
19अंजन रेख नैन गोविंद राधे।
20नासा बेसर अजब बता दे॥ 9168॥
21जादूभरी चितवनि गोविंद राधे।
22मुरि मुरि मुसकनि गजब बता दे॥ 9169॥
23एक चन्द्र की कहा गोविंद राधे।
24कोटि चन्द्र वारूँ तो पै बता दे॥ 9170॥