Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 787
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1तुम सम सरल न गोविंद राधे।
2देखी त्रिभुवन भामिनी बता दे॥ 9147॥
3जैसे सुन्यो हतो गोविंद राधे।
4वैसो ही देख्यो सुभाव बता दे॥ 9148॥
5श्री जू बोलीं तू गोविंद राधे।
6मोते कम नहिं सुन्दरी बता दे॥ 9149॥
7तूने तो मेरो हूँ गोविंद राधे।
8मन को मोहि लियो क्षण में बता दे॥ 9150॥
9मोहिं तो लागे गोविंद राधे।
10तू कोइ देवी स्वर्ग की बता दे॥ 9151॥
11ना ना राधा रानी गोविंद राधे।
12मैं हूँ आभीरकन्या बता दे॥ 9152॥
13तुम्हरो यश सुनि गोविंद राधे।
14मन भयो अति ही विकल बता दे॥ 9153॥
15याते गुरुजन तजि गोविंद राधे।
16आई भाजि प्रिया जू इकली बता दे॥ 9154॥
17प्रिया ने पूछा नाम गोविंद राधे।
18नागरी कह प्रियम्वदा है बता दे॥ 9155॥
19इतने में साँझ भई गोविंद राधे।
20लाली ने कहा यहीं सो जा बता दे॥ 9156॥
21भोर ही सखिन सँग गोविंद राधे।
22पहुँचा दूँगी भवन बता दे॥ 9157॥
23बरबस शय्या पै गोविंद राधे।
24जैसे लिटाई गिरी बंसरी बता दे॥ 9158॥