Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 784
Reading 282 of 452 · Source nos. 9111–9122 · Source PDF 287
1वाई के पग धो धो गोविंद राधे।
2पिया करो आरती उतारो बता दे॥ 9111॥
3यहाँ नाहिं तोरी अब गोविंद राधे।
4दाल कभू गलि पाये बता दे॥ 9112॥
5अब यह मेरा द्वार गोविंद राधे।
6तुम्हरे लिए बन्द हो गया बता दे॥ 9113॥
7अब लौं सहा मैंने गोविंद राधे।
8अब तो अति अति ह्वै गई बता दे॥ 9114॥
9लाल ने देख्यो जब गोविंद राधे।
10काहु भाँति मान नहिं त्यागें बता दे॥ 9115॥
11तब आके बाहर गोविंद राधे।
12ललिता सों कही लाल जू ने बता दे॥ 9116॥
13ललिता तू ही है गोविंद राधे।
14मम उर जाननहार बता दे॥ 9117॥
15तू ही मना ला जा गोविंद राधे।
16प्राणप्यारी सुकुमारी बता दे॥ 9118॥
17लाल की बात मानि गोविंद राधे।
18ललिता गई लाली पास बता दे॥ 9119॥
19ललिता बोली लाली गोविंद राधे।
20आप सी हठीली नहिं जग में बता दे॥ 9120॥
21मान में दोउन को गोविंद राधे।
22दारु ण वियोग दुख प्राप्त हो बता दे॥ 9121॥
23छोटी छोटी बातों में गोविंद राधे।
24जब देखो मान ठानो बता दे॥ 9122॥