Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 785
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1मानिनी मान तजो गोविंद राधे।
2मोरे कर जोरे की मानो बता दे॥ 9123॥
3यह तो तुम मानो हो गोविंद राधे।
4दोऊ हो प्राण दोउन को बता दे॥ 9124॥
5तुम भी चाहो हो गोविंद राधे।
6आठों याम घनश्याम सुखी हों बता दे॥ 9125॥
7मान करो भी तो गोविंद राधे।
8कछु देर में मान जावो बता दे॥ 9126॥
9अब चलो उठो लाली गोविंद राधे।
10लाल को लगावो कण्ठ ते बता दे॥ 9127॥
11लाली मुँह फेरि बोलीं गोविंद राधे।
12तो को क्यों पठायो वाने बता दे॥ 9128॥
13वाके का पायन गोविंद राधे।
14मेहँदी लगी जो न आयो बता दे॥ 9129॥
15ललिता गइ लाल ढिग गोविंद राधे।
16कही अब एक उपाय बता दे॥ 9130॥
17तुम बनो नागरि गोविंद राधे।
18जावो महल ढिग लाड़ली बता दे॥ 9131॥
19जैसो बतायो है गोविंद राधे।
20वैसो ही बोलियो लली सों बता दे॥ 9132॥
21नागरी गई द्रुत गोविंद राधे।
22लाली महल के द्वार बता दे॥ 9133॥
23तहाँ मिली एक सखि गोविंद राधे।
24वाते की नागरी ने विनय बता दे॥ 9134॥