Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 783
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1कंध पै ओढ़नी गोविंद राधे।
2गल की माल उरझाई बता दे॥ 9099॥
3माथे पै पसीना गोविंद राधे।
4तनु काँपे वानी तुतरी बता दे॥ 9100॥
5लाली ने लख्यो लाल गोविंद राधे।
6कह्यो बलिहार बलिहार बता दे॥ 9101॥
7आजु को सो सिंगार गोविंद राधे।
8कभू न भयो ना तो ह्वै है बता दे॥ 9102॥
9लाली तुरत दौरि गोविंद राधे॥
10ल्यायीं दिखाईं दर्पण बता दे॥ 9103॥
11लाल देखि निज गात गोविंद राधे।
12ह्वै गये अति भयभीत बता दे॥ 9104॥
13लाली ने कहा लाल गोविंद राधे।
14वहीं जावो जहाँ रहे रैन बता दे॥ 9105॥
15वही हैं राधारानी गोविंद राधे।
16मैं तो हूँ नौकरानी बता दे॥ 9106॥
17पहले बहुत बार गोविंद राधे।
18तुमने बहकाया मोकूँ बता दे॥ 9107॥
19आज तो रँगे हाथों गोविंद राधे।
20पकरे गये धूर्तराज बता दे॥ 9108॥
21जावो जावो जावो वहीं गोविंद राधे।
22परखत होगी सोई प्यारी बता दे॥ 9109॥
23वाई की सेवा करो गोविंद राधे।
24वाई के चरण पलोटो बता दे॥ 9110॥