लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 782

Reading 280 of 452 · Source nos. 9087–9098 · Source PDF 285

1लाली ने कही अच्छा गोविंद राधे।

2चलु किन्तु वाय समझाय दे बता दे॥ 9087॥

3अब कभु इत उत गोविंद राधे।

4भ्रमर जनु मुँह मारे ना बता दे॥ 9088॥

5जैसे मैं वाही ते गोविंद राधे।

6प्रेम करुँ ह्वै के अनन्य बता दे॥ 9089॥

7वैसे ही साँवरो भी गोविंद राधे।

8प्यार करे केवल मोते बता दे॥ 9090॥

9इतने में साँवरी गोविंद राधे।

10सारी उतारि दइ तन ते बता दे॥ 9091॥

11लखि हँसीं प्यारी जू गोविंद राधे।

12पुनि दोउ मिले लाल लाड़िली बता दे॥ 9092॥

13एक दिन लाल ने गोविंद राधे।

14कहा लाली आवूँगो साँझ को बता दे॥ 9093॥

15पूरी रैन बीत गई गोविंद राधे।

16लाली गिनत रहीं तारे बता दे॥ 9094॥

17आये सबेरे को गोविंद राधे।

18अति ही विचित्र थी झाँकी बता दे॥ 9095॥

19अधरन अंजन गोविंद राधे।

20भाल में मिहावर लाल बता दे॥ 9096॥

21लटपटी पाग अरु गोविंद राधे।

22अटपट भूषन वसन बता दे॥ 9097॥

23पान की पीक गाल गोविंद राधे।

24नैन अरु णारे अलसाने बता दे॥ 9098॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version