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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 776

Reading 274 of 452 · Source nos. 9015–9026 · Source PDF 279

1सब सखि भाजि गईं गोविंद राधे।

2लाली ने लगाया कण्ठ लाल को बता दे॥ 9015॥

3एक दिन नंदलाल गोविंद राधे।

4गये एक बाला के भवन बता दे॥ 9016॥

5रहे तहाँ रात भर गोविंद राधे।

6भोर भई बोले सखि सों बता दे॥ 9017॥

7अब तो सबेरा हुआ गोविंद राधे।

8जाने दो निज घर बाला बता दे॥ 9018॥

9बाला कह कैसे कहूँ गोविंद राधे।

10जाने की सोचि घबराऊँ बता दे॥ 9019॥

11इतने में औचक गोविंद राधे।

12आईं वा घर लाली बता दे॥ 9020॥

13लाली ने टेरि कही गोविंद राधे।

14चलु बाला यमुना नहाने बता दे॥ 9021॥

15ठीक उसी समय गोविंद राधे।

16लाला भी निकसे घर ते बता दे॥ 9022॥

17लाली ने देख लिया गोविंद राधे।

18रिस भरी घर को लौटीं बता दे॥ 9023॥

19लाली के रोम रोम गोविंद राधे।

20क्रोध की लग गई आग बता दे॥ 9024॥

21उत लखि लाली को गोविंद राधे।

22लाल भी अति गये डरपि बता दे॥ 9025॥

23लाल बोले बाला सों गोविंद राधे।

24अब कहा होगा आगे बता दे॥ 9026॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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