Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 775
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1श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
2और बता कछु लँगरई बता दे॥ 9003॥
3पनिहारिनि कह गोविंद राधे।
4एक दिन डगर में लँगर बता दे॥ 9004॥
5मोते कही सुनु सखि गोविंद राधे।
6मैंने लख्यो इक सपनो बता दे॥ 9005॥
7मैं कछु बोली नहिं गोविंद राधे।
8तब कहा सपनो पूछ ना बता दे॥ 9006॥
9सपने में मोरी तोरी गोविंद राधे।
10हो गई सगाई ब्याहु होगा बता दे॥ 9007॥
11एक दिन गागरि भरि गोविंद राधे।
12जाति रही निज घर को बता दे॥ 9008॥
13पाछे ते मारि दई गोविंद राधे।
14लँगर ने गागरी में काँकरी बता दे॥ 9009॥
15गागरी फूटि गई गोविंद राधे।
16सास की खाई बड़ी डाट बता दे॥ 9010॥
17श्री जी बोलीं याय गोविंद राधे।
18संग ले जावो सब सखियाँ बता दे॥ 9011॥
19सखि लखि चाल ढाल गोविंद राधे।
20जानि गइँ यह नँदलाल बता दे॥ 9012॥
21उर ते लगाया जब गोविंद राधे।
22ललिता ने गिरी मुरली बता दे॥ 9013॥
23ललिता कहीं लाली गोविंद राधे।
24यह लाली नहिं लाला है बता दे॥ 9014॥