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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 774

Reading 272 of 452 · Source nos. 8991–9002 · Source PDF 277

1तुम महरानी हो गोविंद राधे।

2न्याय करो दण्ड दो लाल को बता दे॥ 8991॥

3श्री जी कह सखि गोविंद राधे।

4लाल तो ब्रज सरताज बता दे॥ 8992॥

5लाल की सब लीला गोविंद राधे।

6रस ही रस ते पूर्ण हैं बता दे॥ 8993॥

7लाल के छेड़ने में गोविंद राधे।

8सबरी सखिन सुखी होयें बता दे॥ 8994॥

9पनिहारिनि कह गोविंद राधे।

10आपु भी लें वाको पक्ष बता दे॥ 8995॥

11आपु के साथ कभू गोविंद राधे।

12लँगर ने की नहिं लँगरई बता दे॥ 8996॥

13श्री जी बोलीं काहे गोविंद राधे।

14नन्द के ढोटा को खोटा बता दे॥ 8997॥

15अच्छा बता तो सखि गोविंद राधे।

16तेरे साथ कौन लँगरई की बता दे॥ 8998॥

17पनिहारिनि कह गोविंद राधे।

18कौन कौन लँगरई बताऊँ बता दे॥ 8999॥

19जल भरा घट फोरे गोविंद राधे।

20गर लर मोतिन तोरे बता दे॥ 9000॥

21घूँघट खोले कहे गोविंद राधे।

22मैं ही तेरा भरतार बता दे॥ 9001॥

23चुनरी उतारे सिर गोविंद राधे।

24बार बार कहे “मेरी प्यारी” बता दे॥ 9002॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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