Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 770
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1काहे को मौन धारे गोविंद राधे।
2काहे को मुँह लटकाये बता दे॥ 8943॥
3कौन है गाम तेरो गोविंद राधे।
4कितको जा रही साँवरी बता दे॥ 8944॥
5साँवरी बोली सखि गोविंद राधे।
6मेरो है गाम नन्दगाम बता दे॥ 8945॥
7प्यारी को मिलिवे को गोविंद राधे।
8जा रही हूँ भली मिली तू मिला दे॥ 8946॥
9ऋणियाँ रहूँगी तोरी गोविंद राधे।
10चलु चलु बेगि मोहिं प्यारी ते मिला दे॥ 8947॥
11सखि बोली साँवरी ते गोविंद राधे।
12एक बात मेरी गाँठ बाँधि ले बता दे॥ 8948॥
13तेरो अनूप रूप गोविंद राधे।
14याते न निकल कभु इकली बता दे॥ 8949॥
15ऐसो कौन नर नारी गोविंद राधे।
16जो तोहिं लखि नहिं मोहे बता दे॥ 8950॥
17अच्छा चलु साँवरी गोविंद राधे।
18प्यारी जू के महल बता दे॥ 8951॥
19श्री जू ने दूर ते ही गोविंद राधे।
20आमती देखी एक सुन्दरी बता दे॥ 8952॥
21पूछा सखी ते क्यों री गोविंद राधे।
22यह कौन साँवरी साथ है बता दे॥ 8953॥
23याको है नाम कहा गोविंद राधे।
24याको है गाम कहा मोहिं बता दे॥ 8954॥