Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 769
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1सखी बोली लाली जू गोविंद राधे।
2एक बार मेरे कहे क्षमा दो बता दे॥ 8931॥
3तुम्हरो दुख मोते गोविंद राधे।
4देखो नहिं जाय साँची बता दे॥ 8932॥
5श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
6बार बार काहे जान खाये बता दे॥ 8933॥
7मोको तो जानि परे गोविंद राधे।
8तेरी कछु वाते मिली भगत है बता दे॥ 8934॥
9हौं नहिं मानूँ जा जा गोविंद राधे।
10उनकी ही चमची बनि जा बता दे॥ 8935॥
11वाकी बात करि करि गोविंद राधे।
12काहे जलावे मोरा जियरा बता दे॥ 8936॥
13सखी निराश हो के गोविंद राधे।
14आई लौटि प्रियतम पास बता दे॥ 8937॥
15सखी ने कहा लाला गोविंद राधे।
16लाली नहिं मानें अब कैसेहूँ बता दे॥ 8938॥
17मेरी मानो मोहन गोविंद राधे।
18प्रिया बनि जावो मिलो प्रिया सों बता दे॥ 8939॥
19सखी की बात मानि गोविंद राधे।
20पिया ने बनायो भेष प्रिया को बता दे॥ 8940॥
21मारग में एक सखि गोविंद राधे।
22आमतो देखि पूछी रोकि के बता दे॥ 8941॥
23संग न सहेली तेरे गोविंद राधे।
24फिरति अकेली काहे नेकु बता दे॥ 8942॥