Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 768
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1श्याम तो तोको ही गोविंद राधे।
2अपनो जीवन मानें बता दे॥ 8919॥
3श्री जू बोलीं चलु गोविंद राधे।
4और को पढ़ा सखि पट्टी बता दे॥ 8920॥
5जानूँ मैं भलीभाँति गोविंद राधे।
6वाको रंग ढंग हाल चाल बता दे॥ 8921॥
7सखि बोली प्रिया जू गोविंद राधे।
8श्याम पटतर जग कौन है बता दे॥ 8922॥
9उनकी छबीली छवि गोविंद राधे।
10काम को भी धराशायी क रा दे॥ 8923॥
11नटखटपना तो है गोविंद राधे।
12ऊपर ते ही दिखावटी बता दे॥ 8924॥
13श्री जी बोलीं काहे गोविंद राधे।
14खोपड़ा खाये जा भागु बता दे॥ 8925॥
15हौं नहिं चाहूँ वाकी गोविंद राधे।
16सूरत देखनो भूलिहूँ बता दे॥ 8926॥
17सखी बोली लाली जू गोविंद राधे।
18तुम तो अत्यन्त भोरी बता दे॥ 8927॥
19सब की झूठीमूठी गोविंद राधे।
20बातन को सच मान लो बता दे॥ 8928॥
21श्री जी बोलीं जा जा गोविंद राधे।
22हौं नहिं चह कछु सुननो बता दे॥ 8929॥
23तो को सो भावे तो गोविंद राधे।
24जा वाही गर लागि जा बता दे॥ 8930॥