Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 763
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1पुनि मनिहारिनि गोविंद राधे।
2सुधि भूली छुट्यो कर कर ते बता दे॥ 8859॥
3इत मनिहारिनि गोविंद राधे।
4इकटक लखे श्यामा को बता दे॥ 8860॥
5श्यामा भी एकटक गोविंद राधे।
6लखें उत मनिहारिनि को बता दे॥ 8861॥
7गिरी मनिहारिनि गोविंद राधे।
8“कहि हा राधे!” अवनि बता दे॥ 8862॥
9मनिहारिनि को गोविंद राधे।
10मुर्छित लखि कह ललिता बता दे॥ 8863॥
11सुनो सब सखियों गोविंद राधे।
12यह मनिहारिनि नहीं है बता दे॥ 8864॥
13सुना था यशुदा के गोविंद राधे।
14हुई थी कोई कन्या बता दे॥ 8865॥
15उस कन्या को तो गोविंद राधे।
16मारा था क्रूर कंस ने बता दे॥ 8866॥
17वही यह कन्या है गोविंद राधे।
18बनि भूतिनी आई छलन बता दे॥ 8867॥
19याते सब भाजो न तु गोविंद राधे।
20काउ को खायेगी भूतिनी बता दे॥ 8868॥
21इमि कहि भाजीं सब गोविंद राधे।
22लाल को उठाय लीनो लाली ने बता दे॥ 8869॥
23उर ते लगा के लाली गोविंद राधे।
24लाल को दीनी चेतना बता दे॥ 8870॥