Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 764
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1पुनि मिले लाली लाल गोविंद राधे।
2हा पिय हा प्यारी कहि के बता दे॥ 8871॥
3एक बार श्री कृष्ण गोविंद राधे।
4गोपी बनि गये बरसाना बता दे॥ 8872॥
5बरसाने में वे गोविंद राधे।
6मिले वृषभानुनंदिनी ते बता दे॥ 8873॥
7कहा सुनु राधारानी गोविंद राधे।
8नँदनंदन बड़ो बुरो है बता दे॥ 8874॥
9वाकी करतूत ते तो गोविंद राधे।
10ब्रजवास करना असम्भव बता दे॥ 8875॥
11सबते कहत फिरे गोविंद राधे।
12तू तो है “मेरी प्राणप्यारी” बता दे॥ 8876॥
13तुम को भी ऐसे ही गोविंद राधे।
14भोरी जानि धोखा दे रहा बता दे॥ 8877॥
15भौंरे के समान वह गोविंद राधे।
16फूल फूल रस लेता फिरता बता दे॥ 8878॥
17राधा ने कहा सखि गोविंद राधे।
18यह तो नँदनंदन गुण है बता दे॥ 8879॥
19मेरा रोम रोम जाने गोविंद राधे।
20मोते है प्रेम अनन्त बता दे॥ 8880॥
21प्रेम की कुटिल गति गोविंद राधे।
22भीतर बाहर एक ना बता दे॥ 8881॥
23कृष्ण तो सबके हैं गोविंद राधे।
24तू भी प्यार करि जन्म सफल बना दे॥ 8882॥