Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 762
Reading 260 of 452 · Source nos. 8847–8858 · Source PDF 265
1लाली बोलीं सखि गोविंद राधे।
2ले कर पहिरा चुरियाँ बता दे॥ 8847॥
3मनिहारिनि मन गोविंद राधे।
4ह्वै गई विभोर कर परसि बता दे॥ 8848॥
5मनिहारिनि तनु गोविंद राधे।
6स्वेद रोमांच कम्पन हो बता दे॥ 8849॥
7लाली को करतल गोविंद राधे।
8कमलहुँ ते कोमल है बता दे॥ 8850॥
9किन्तु मनिहारिनि गोविंद राधे।
10बार बार लाली कर चापे बता दे॥ 8851॥
11मानिहारिनि मन गोविंद राधे।
12उमग्यो प्रेमरससिन्धु बता दे॥ 8852॥
13ह्वै के सावधान गोविंद राधे।
14दौरि के लाई दल कदली बता दे॥ 8853॥
15दल करतल धरि गोविंद राधे।
16बार बार चूरी चढ़ावे बता दे॥ 8854॥
17फिर भी चढ़े ना चूरी गोविंद राधे।
18टूट जाय पुनि पुनि कर में बता दे॥ 8855॥
19लाली ने जानि लई गोविंद राधे।
20है अभी यह नौसिखिया बता दे॥ 8856॥
21चूरी के बार बार गोविंद राधे।
22टूटने ते लाली कर पीड़ा हो बता दे॥ 8857॥
23पीड़ा ते लाली भरें गोविंद राधे।
24बार बार मधुभरी सिसकरी बता दे॥ 8858॥