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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 757

Reading 255 of 452 · Source nos. 8787–8798 · Source PDF 260

1श्री जू बोलीं सखि गोविंद राधे।

2सचमुच रूप अनूप बता दे॥ 8787॥

3सुन्दरता ते हूँ गोविंद राधे।

4सुन्दरि है मालिनि तू बता दे॥ 8788॥

5तेरे हाव भाव ते गोविंद राधे।

6हौं हूँ ह्वै गई मुग्ध बता दे॥ 8789॥

7अब लौं मुझे रूप गोविंद राधे।

8गर्व था हुआ चूर चूर बता दे॥ 8790॥

9मालिनि कह लाली गोविंद राधे।

10झूठी प्रशंसा जनि करहु बता दे॥ 8791॥

11कहाँ तुम महरानी गोविंद राधे।

12कहाँ हौं हौं नौकरानी बता दे॥ 8792॥

13यह लो तुम्हारे काज गोविंद राधे।

14लाई हूँ भूषण फुलन बता दे॥ 8793॥

15चम्पा चमेली आदि गोविंद राधे।

16फुलन के हार हमेल बता दे॥ 8794॥

17लाली ने कहा अच्छा गोविंद राधे।

18ला फूलन भूषण पहिरा दे॥ 8795॥

19भूषनन नाम लै लै गोविंद राधे।

20पहिराई अंग अंग मालिनि बता दे॥ 8796॥

21बार बार तनु काँपे गोविंद राधे।

22निकले पसीना पूछें प्यारी बता दे॥ 8797॥

23क्यों री मालिनि गोविंद राधे।

24तो को है कछु रोग का बता दे॥ 8798॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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