Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 756
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1प्यारी को बतायो वाने गोविंद राधे।
2एक मालिनि आई सुघर बता दे॥ 8775॥
3वाको रूप रंग लखि गोविंद राधे।
4कोटि कोटि रति भी लजाय बता दे॥ 8776॥
5ऐसी सुन्दरी ना गोविंद राधे।
6देखी आप भी देखो बता दे॥ 8777॥
7लाली मुसकाईं कहा गोविंद राधे।
8लै आवो वाय महल बता दे॥ 8778॥
9लाली ने कहा टुक गोविंद राधे।
10हौं हूँ तो देखूँ सुन्दरता बता दे॥ 8779॥
11द्वार सखी गई गोविंद राधे।
12कहा तू मालिनि धन्य है बता दे॥ 8780॥
13तो सों मिलिवे को गोविंद राधे।
14प्यारी जू विकल हैं चलु चलु बता दे॥ 8781॥
15तू बड़भागिनि गोविंद राधे।
16श्री जू की कृपा तो पै बता दे॥ 8782॥
17सखी वचन सुनि गोविंद राधे।
18मालिनि प्रेमविभोर बता दे॥ 8783॥
19घूँघट के ओट महँ गोविंद राधे।
20झुकि के प्रणाम किया मालिनी बता दे॥ 8784॥
21मोते क्यों लाज करे गोविंद राधे।
22मैंने तो मान्यो तोहिं सखी सी बता दे॥ 8785॥
23सुनो महरानी जू गोविंद राधे।
24बड़ों सों लाज मोहिं लागे बता दे॥ 8786॥