Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 755
Reading 253 of 452 · Source nos. 8763–8774 · Source PDF 258
1अंग अंग रंग रंग गोविंद राधे।
2फुलन को भूषण लाइ हौं बता दे॥ 8763॥
3द्वार सखी तुम गोविंद राधे।
4जाय खबर यह लाली को बता दे॥ 8764॥
5द्वार सखी कह गोविंद राधे।
6नेकु विरमु मालिनियाँ बता दे॥ 8765॥
7श्री जू अभी अभी गोविंद राधे।
8स्नान करन को गई हैं बता दे॥ 8766॥
9इतने में एक सखि गोविंद राधे।
10आ के पूछे द्वार सखी ते बता दे॥ 8767॥
11इतनी सुन्दर गोविंद राधे।
12कोउ मालिनि देखी ना बता दे॥ 8768॥
13कहाँ ते आई यह गोविंद राधे।
14कौन काज ठाढ़ी है पौरी बता दे॥ 8769॥
15याने तो मुसका के गोविंद राधे।
16मेरो हुँ मन लियो मोहि बता दे॥ 8770॥
17द्वार सखी कह गोविंद राधे।
18यह मालिनि अभी आई बता दे॥ 8771॥
19लाली के हित यह गोविंद राधे।
20फुलन के भूषण ल्याई बता दे॥ 8772॥
21मैं जावूँ प्यारी ढिग गोविंद राधे।
22खबर करिवे को महल बता दे॥ 8773॥
23इमि कहि द्वार सखि गोविंद राधे।
24तुरत गई प्यारी पास बता दे॥ 8774॥