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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 754

Reading 252 of 452 · Source nos. 8751–8762 · Source PDF 257

1श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।

2जनि करु नेह नटखट ते बता दे॥ 8751॥

3नटखट निठुर अति गोविंद राधे।

4मेरी मानि ले तू वाको भुला दे॥ 8752॥

5विरहिनि बोली सखि गोविंद राधे।

6वाको भुलाना असम्भव बता दे॥ 8753॥

7ज्यों ज्यों भुलावूँ वाय गोविंद राधे।

8त्यों त्यों और सुधि आये बता दे॥ 8754॥

9श्री जी बोलीं चलु गोविंद राधे।

10सो जा आई रजनी बता दे॥ 8755॥

11पलँग पै सोते ही गोविंद राधे।

12मुरली गिरी उर बाहर बता दे॥ 8756॥

13श्री जी ने जानि लइ गोविंद राधे।

14पिय को लगाया कंठ ते बता दे॥ 8757॥

15कह्यो सखि सखि सों गोविंद राधे।

16टुक मालिनि लीला मोय सुना दे॥ 8758॥

17सखि सुनु एक दिन गोविंद राधे।

18भोर उठि छलसिरमोर बता दे॥ 8759॥

19मालिनि भेष धरि गोविंद राधे।

20गये महलद्वार प्रिया के बता दे॥ 8760॥

21द्वार सखी सों गोविंद राधे।

22मालिनि बोली मधुर बता दे॥ 8761॥

23मैं हूँ मालिनि गोविंद राधे।

24लाली हित लाई फूल डलिया बता दे॥ 8762॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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