Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 753
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1मेरे प्राण लै के भी गोविंद राधे।
2कोई मिला दे प्राणनाथ सों बता दे॥ 8739॥
3श्री जी बोलीं तू गोविंद राधे।
4मान जा प्रेम पंथ कठिन बता दे॥ 8740॥
5विरहिनि बोली सखि गोविंद राधे।
6घायल ही जाने गति घायल बता दे॥ 8741॥
7आपु को लगेगी जब गोविंद राधे।
8विरहाग तब जानोगी बता दे॥ 8742॥
9श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
10मानु मानु जा निज भवन बता दे॥ 8743॥
11काऊ को बतैयो ना गोविंद राधे।
12प्रेम बताने ते घटेगो बता दे॥ 8744॥
13मिलन ते विरह तो गोविंद राधे।
14श्रेष्ठ ही मानें सब रसिक बता दे॥ 8745॥
15विरहिनि बोली सखि गोविंद राधे।
16बिनु देखे घर जाउँ ना बता दे॥ 8746॥
17श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
18आज रात रहु मम महल बता दे॥ 8747॥
19किन्तु यह मूल मंत्र गोविंद राधे।
20भूलो जनि वाकी सुरति भुला दे॥ 8748॥
21विरहिनि बोली सखि गोविंद राधे।
22आजु रात पावूँ जो पिय को बता दे॥ 8749॥
23वाते मनभायी करुँ गोविंद राधे।
24चूमूँ चिपटावूँ चापूँ चरण बता दे॥ 8750॥