Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 752
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1सुधि बुधि भूली सब गोविंद राधे।
2दिन नहिं चैन रैन नींद ना बता दे॥ 8727॥
3कहा महरानी ने गोविंद राधे।
4जो भी लखे वाय जाय काम ते बता दे॥ 8728॥
5कोटि काम कमनीय गोविंद राधे।
6हैं वे सलोने श्यामसुन्दर बता दे॥ 8729॥
7विरहिनि बोली अब गोविंद राधे।
8जिवूँ कैसे मरूँ कैसे मोय बता दे॥ 8730॥
9श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
10याकी है औषधि वाय भुला दे॥ 8731॥
11विरहिनि बोली अब गोविंद राधे।
12लागी नहिं छूटे चाहे प्राण गमा दे॥ 8732॥
13श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
14चुप रह जो भी सुने हँसे सो बता दे॥ 8733॥
15विरहिनि बोली सखि गोविंद राधे।
16हँसे तो हँसे लाज तज दी बता दे॥ 8734॥
17श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
18वाको सुमिरन दुखद बता दे॥ 8735॥
19विरहिनि बोली सखि गोविंद राधे।
20उर में लाग आग बुझे ना बता दे॥ 8736॥
21श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
22प्रेम में धैर्य अनिवार्य बता दे॥ 8737॥
23विरहिनि बोली सखि गोविंद राधे।
24पलक लगे मोहिं कलप बता दे॥ 8738॥