Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 758
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1मालिनि कह लाली गोविंद राधे।
2बड़ों ते लागे डर मोको बता दे॥ 8799॥
3लाली कहीं सखि सुनु गोविंद राधे।
4बड़ अचरज मोहिं लागे बता दे॥ 8800॥
5कहाँ तू मालिनि गोविंद राधे।
6कहाँ मैं राजकुमारी बता दे॥ 8801॥
7फिर भी क्यों इतनो गोविंद राधे।
8प्रेम हो गया तो सों सहज बता दे॥ 8802॥
9मालिनि बोली लाली गोविंद राधे।
10मोर ज्यों करे प्यार घन ते बता दे॥ 8803॥
11ऐसे ही चन्द्रमा ते गोविंद राधे।
12करे ज्यों प्यार चकोर बता दे॥ 8804॥
13प्रेम में देरी दूरी गोविंद राधे।
14हो सके ना कभू बाधक बता दे॥ 8805॥
15तुम हो भोरी भारी गोविंद राधे।
16श्री वृषभानुदुलारी बता दे॥ 8806॥
17तुम्हरे यश को तो गोविंद राधे।
18गावें सुर नर मुनि भी बता दे॥ 8807॥
19जापै तुम कृपा करो गोविंद राधे।
20वाको ही मिले प्यार तुम्हरो बता दे॥ 8808॥
21तुम्हरो है नाम राधा गोविंद राधे।
22जो भी रटे मिटे वाकी बाधा बता दे॥ 8809॥
23श्री जी बोलीं सखि गोविंद राधे।
24तू तो लगे प्राणप्यारी बता दे॥ 8810॥