Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 748
Reading 246 of 452 · Source nos. 8679–8690 · Source PDF 251
1औचक एक सखी गोविंद राधे।
2आई तो देखा गिरी बाला बता दे॥ 8679॥
3बाला को चेत हुआ गोविंद राधे।
4तब पूछा हुई क्यों अचेत बता दे॥ 8680॥
5काहे लोटे भूमि पै गोविंद राधे।
6काहे करे हाय हाय नेकु बता दे॥ 8681॥
7बाला कह सखि सुनु गोविंद राधे।
8बिनु देखे नन्दलाल चैन ना बता दे॥ 8682॥
9जाने का जादू किया गोविंद राधे।
10पल पल लागे मोहिं कलप बता दे॥ 8683॥
11सखि कह बाला सुनु गोविंद राधे।
12वाकी जनि करु सुधि भूलिहूँ बता दे॥ 8684॥
13नव बाला कह गोविंद राधे।
14चाहे जायें प्राण नहिं भूलूँ बता दे॥ 8685॥
15अति ही प्रयत्न किया गोविंद राधे।
16भूलने का किन्तु नाहिं भूली बता दे॥ 8686॥
17यत्र तत्र सर्वत्र गोविंद राधे।
18वही एक नीलमणि दीखे बता दे॥ 8687॥
19तिरछी चितवनि गोविंद राधे।
20मृदु मुसकनि नहिं भूले बता दे॥ 8688॥
21सखि कह सुनु बाला गोविंद राधे।
22लागी बुरी है बलाय बता दे॥ 8689॥
23याते ले मान मेरी गोविंद राधे।
24मन को और कहीं अनत लगा दे॥ 8690॥