Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 749
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1बाला कह सखि सुनु गोविंद राधे।
2मन न रहा मेरे हाथ बता दे॥ 8691॥
3मन हरि लै गया गोविंद राधे।
4वाइ छिन जा छिन देखा बता दे॥ 8692॥
5सखि कह नवबाला गोविंद राधे।
6माने ना तो हो बावरी बता दे॥ 8693॥
7बाला कह कहा करुँ गोविंद राधे।
8कित जाऊँ सखि तू ही बता दे॥ 8694॥
9सखि कह बाला यह गोविंद राधे।
10प्रेमपंथ है जानलेवा बता दे॥ 8695॥
11याते तू छोड़ याय गोविंद राधे।
12यामें लखु बार बार दोष बता दे॥ 8696॥
13बाला कह सखि सुनु गोविंद राधे।
14जो होना था हो गया बता दे॥ 8697॥
15रोम रोम रमा श्याम गोविंद राधे।
16घूँघट का ओट व्यर्थ है बता दे॥ 8698॥
17सखी ने जाना जब गोविंद राधे।
18बिनु दर्शन मर जायेगी बता दे॥ 8699॥
19तब कहा बाला चलु गोविंद राधे।
20निधिवन श्याम सों तोहिं मिला दे॥ 8700॥
21निधिवन में मिले गोविंद राधे।
22छैल छबीले श्याम बता दे॥ 8701॥
23बाला ने कहा सखि गोविंद राधे।
24मानूँगी मैं आभार बता दे॥ 8702॥