Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 743
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1श्याम बोले मेरो मन गोविंद राधे।
2जैसे हर्यो स्वामिनी ने बता दे॥ 8619॥
3ऐसे ही मैंने भी गोविंद राधे।
4हर्यो मन मेरो दोष का बता दे॥ 8620॥
5तुम सब सखियों ने गोविंद राधे।
6धर्यो नाम मम चितचोर बता दे॥ 8621॥
7तुम सब भी तो हो गोविंद राधे।
8मोरेहूँ चित चोरनी बता दे॥ 8622॥
9सखि बोली चलो हटो गोविंद राधे।
10परनारिन मग रोको ना बता दे॥ 8623॥
11श्याम कह, नैनन गोविंद राधे।
12बान चलावे कहे हटो तू बता दे॥ 8624॥
13सखी ने कहा श्याम गोविंद राधे।
14परनारी ते ऐसे कहो ना बता दे॥ 8625॥
15हम हैं पराई नारि गोविंद राधे।
16हमसे हँसी ठट्ठा करो ना बता दे॥ 8626॥
17सिर पै हमारे बोझ गोविंद राधे।
18ऊपर ते रोको डगर बता दे॥ 8627॥
19अब तो या ब्रज को ही गोविंद राधे।
20त्यागनो परेगो हम सब को बता दे॥ 8628॥
21सखी की बात सुनि गोविंद राधे।
22श्याम ने झट घट पटक्यो बता दे॥ 8629॥
23सखी ने डाटा तो गोविंद राधे।
24श्याम ने चुनरी भी झटकी बता दे॥ 8630॥