Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 732
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1सखियाँ परस्पर गोविंद राधे।
2लाल की बात करत लौटीं बता दे॥ 8487॥
3एक सखी बोली गोविंद राधे।
4अब कैसे लाल घर आवे बता दे॥ 8488॥
5बिनु लाल घर आये गोविंद राधे।
6बिनु देखे दिन बीते ना बता दे॥ 8489॥
7जब ते लगी है आँखि गोविंद राधे।
8तब ते लागी ना आँखि पिया को बता दे॥ 8490॥
9मिले तो थे नैन नैन गोविंद राधे।
10चोरी चित्त की भई कैसे बता दे॥ 8491॥
11लड़े तो थे नैन नैन गोविंद राधे।
12चोट लगी चित्त में कैसे बता दे॥ 8492॥
13सखी ने कहा अब गोविंद राधे।
14हम सब मैया ते कहेंगे बता दे॥ 8493॥
15अब तो लाला ने गोविंद राधे।
16लँगरई करनो छोड़ दी बता दे॥ 8494॥
17अब तो काऊ घर गोविंद राधे।
18करे ना ऊधम लाला बता दे॥ 8495॥
19मैया कभू कभू गोविंद राधे।
20लाल को हमरेहुँ घर में पठा दे॥ 8496॥
21तू बड़भागिनि गोविंद राधे।
22जासों लाल पायो ऐसो बता दे॥ 8497॥
23अब हम लाला को गोविंद राधे।
24दूर ते देखेंगी छुयें ना बता दे॥ 8498॥