लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 733

Reading 231 of 452 · Source nos. 8499–8510 · Source PDF 236

1जो भी कहेगो लाल गोविंद राधे।

2सोई करूँगी मैया साँची बता दे॥ 8499॥

3पद्मा सखी ने कहा गोविंद राधे।

4सुनु अन्तरंग सखि मोहिनी बता दे॥ 8500॥

5नंद को आयो आजु गोविंद राधे।

6मोरे घर कियो वाने गजब बता दे॥ 8501॥

7कछु खायो कछु गोविंद राधे।

8सखन खिलायो माखन बता दे॥ 8502॥

9खाके खिला के पुनि गोविंद राधे।

10मटुकी हूँ दई फोरि बता दे॥ 8503॥

11पकरन दौरी तो गोविंद राधे।

12पकरि न पाई छलबलिया बता दे॥ 8504॥

13कछु दूर जा के वाने गोविंद राधे।

14हँसि के दिखायो अँगुठा बता दे॥ 8505॥

15उत ते आमती गोविंद राधे।

16काउ सखी ने वाय पकरी बता दे॥ 8506॥

17अब तो सो भोरे मुख गोविंद राधे।

18है गयो रुवाँसो सो निपट बता दे॥ 8507॥

19वाको रुवाँसो लखि गोविंद राधे।

20छोड़ि दइ मैंने नंदलाल को बता दे॥ 8508॥

21इतने में आई तहँ गोविंद राधे।

22औचक कस्तूरी भी बता दे॥ 8509॥

23कस्तूरी बोली गोविंद राधे।

24मोहूँ बहुत खिझावे बता दे॥ 8510॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version