Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 730
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1इतने में सामने ते गोविंद राधे।
2आमतो लख्यो वाके पति को बता दे॥ 8463॥
3लाल ने कहा सखि गोविंद राधे।
4मेरो कर लाग्यो दूखने बता दे॥ 8464॥
5याते मम दूजो कर गोविंद राधे।
6करि के दया ले पकरि बता दे॥ 8465॥
7मुख धरि तर्जनि गोविंद राधे।
8पति को किया संकेत बता दे॥ 8466॥
9पुनि पति के ही गोविंद राधे।
10कर को दिया पकराय बता दे॥ 8467॥
11ना तो रँगीली जानी गोविंद राधे।
12घूँघट में निज पति को बता दे॥ 8468॥
13ना ही पति ने जाना गोविंद राधे।
14घूँघट में निज नारी बता दे॥ 8469॥
15इतने में औचक गोविंद राधे।
16लाला भाजि गये घर को बता दे॥ 8470॥
17पति ने कहा तू है गोविंद राधे।
18कौन? लिया कर पकरि बता दे॥ 8471॥
19रँगीली बोली चोर गोविंद राधे।
20आजु नहिं छोडूँगी तोय बता दे॥ 8472॥
21संकोच के वश गोविंद राधे।
22पति भी चला जा रहा था बता दे॥ 8473॥
23मैया के द्वार पै गोविंद राधे।
24टेरि के बोली रँगीली बता दे॥ 8474॥