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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 729

Reading 227 of 452 · Source nos. 8451–8462 · Source PDF 232

1माखन चुरामतो गोविंद राधे।

2पकरि के लावो तब मानूँ बता दे॥ 8451॥

3मनभाती रसमाती गोविंद राधे।

4गोपियाँ गईं निज घर को बता दे॥ 8452॥

5कृष्ण ने चुराया चित्त गोविंद राधे।

6माखन चोरी तो तुच्छ बता दे॥ 8453॥

7भोर ही रँगीली तो गोविंद राधे।

8उठि बैठी द्वार खोलि बता दे॥ 8454॥

9लाल की प्रतीक्षा में गोविंद राधे।

10पल पल लागे वाय कलप बता दे॥ 8455॥

11इतने में आये लाल गोविंद राधे।

12चुपके ते मटुकी उठाया बता दे॥ 8456॥

13माखन खाने को गोविंद राधे।

14मटुकी में डारा जब हाथ बता दे॥ 8457॥

15चुपके ते पाछे ते गोविंद राधे।

16पकरा सखी ने रँगे हाथ बता दे॥ 8458॥

17इतने में आईं तहँ गोविंद राधे।

18उषा, श्यामा आदि कई सखियाँ बता दे॥ 8459॥

19सबने कही याय गोविंद राधे।

20अब लै चलो पास मैया बता दे॥ 8460॥

21पकरा रँगीली ने गोविंद राधे।

22एक कर ते लाल कर को बता दे॥ 8461॥

23दूसरे कर ते तो गोविंद राधे।

24निज घूँघट भी पकरा बता दे॥ 8462॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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