Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 726
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1इतने में आई तहँ गोविंद राधे।
2उषा नाम की एक गोपी बता दे॥ 8415॥
3उषा ने कही मैया गोविंद राधे।
4मैंने आँखन देखी बता दे॥ 8416॥
5माखन बिखर्यो है गोविंद राधे।
6मटुकी फूटी परी है बता दे॥ 8417॥
7उषा ने कही मैया गोविंद राधे।
8अब तो ह्वै गई अति ही बता दे॥ 8418॥
9मैया तू भोर में तो गोविंद राधे।
10सोती रहे उठे देर ते बता दे॥ 8419॥
11लाल उठि चुपके ते गोविंद राधे।
12हम सब घरन को आवे बता दे॥ 8420॥
13ऐसो ही उत्पात गोविंद राधे।
14घर घर में फिरे करत बता दे॥ 8421॥
15अब या ब्रज रहो गोविंद राधे।
16तुम अरु तुम्हरो लाड़लो बता दे॥ 8422॥
17सुनि के उराहनो गोविंद राधे।
18मैया भई अति कुपित बता दे॥ 8423॥
19मैया कह भोर में तो गोविंद राधे।
20लाल को जगाऊँ तब जागे बता दे॥ 8424॥
21तुम सब झूठी हो गोविंद राधे।
22मेरो लाल काऊ घर जाये ना बता दे॥ 8425॥
23तुम ही लाला के गोविंद राधे।
24हाथ पकरि लै जावो बता दे॥ 8426॥