Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 723
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1वह दिन कब आवे गोविंद राधे।
2जब हौं हूँ लखूँ लीला बता दे॥ 8379॥
3श्यामा कह श्याम तो गोविंद राधे।
4तेरी गली ते नित निकरे बता दे॥ 8380॥
5तू तो सबेरे उठे गोविंद राधे।
6देर ते याते नहिं देखे बता दे॥ 8381॥
7कालि सबेरे ही गोविंद राधे।
8द्वार पै तू खड़ी रहियो बता दे॥ 8382॥
9रात को रँगीली को गोविंद राधे।
10नींद नाहिं आई रही सोचती बता दे॥ 8383॥
11कब हो सबेरा अरु गोविंद राधे।
12कब मैं देखूँ श्याम को बता दे॥ 8384॥
13भोर सबेरे उठि गोविंद राधे।
14माखन लै के खरी हो गई बता दे॥ 8385॥
15इतने में आये लाल गोविंद राधे।
16पुलक रँगीली तनु हर्ष में बता दे॥ 8386॥
17बोली रँगीली लाल गोविंद राधे।
18आओ आज मेरी कुंज बता दे॥ 8387॥
19दूध मलाई दधि गोविंद राधे।
20जितनो रुचे खाओ तितनो बता दे॥ 8388॥
21मुरली मधुर तान गोविंद राधे।
22एक बार मोहूँ सुनाओ बता दे॥ 8389॥
23लाल जी बोले सखि गोविंद राधे।
24आज नाहिं फिर कभू आवूँगो बता दे॥ 8390॥