Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 722
Reading 220 of 452 · Source nos. 8367–8378 · Source PDF 225
1आज तो श्यामा तू गोविंद राधे।
2बहुत ही है रही प्रसन्न बता दे॥ 8367॥
3मोको तो बता तूने गोविंद राधे।
4कहा है पायो खजानो बता दे॥ 8368॥
5बहना रँगीली सुनु गोविंद राधे।
6आज देखी छवि लाल की बता दे॥ 8369॥
7आज ही मेरे घर गोविंद राधे।
8प्रातःकाल आये लाल बता दे॥ 8370॥
9मैं भी लखि चुपके ते गोविंद राधे।
10पट तानि झूठमूठ सो गई बता दे॥ 8371॥
11लाल भी दोउ कर गोविंद राधे।
12माखन खाने लगे थे बता दे॥ 8372॥
13चहुँ दिशि बार बार गोविंद राधे।
14देखते भी जाते थे बता दे॥ 8373॥
15पुनि लखि मणिखम्भ गोविंद राधे।
16निज प्रतिबिम्ब जानि दूसरो बता दे॥ 8374॥
17निज प्रतिबिम्ब को ही गोविंद राधे।
18बार बार माखन खिलावें बता दे॥ 8375॥
19माखन गिरे भू पै गोविंद राधे।
20पुनि प्रतिबिम्ब मुख डारें बता दे॥ 8376॥
21हौं यह दृश्य देखि गोविंद राधे।
22तन मन प्राण दई वार बता दे॥ 8377॥
23बोली रँगीली सखि गोविंद राधे।
24मोरेहुँ घर कभू आवेंगे बता दे॥ 8378॥