Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 721
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1कान्ह ने सोचा अब गोविंद राधे।
2मारेगी मैया मोहिं साँटी बता दे॥ 8355॥
3योगमाया ते कान्ह गोविंद राधे।
4गोपी के पति का ही रूप धरा दे॥ 8356॥
5मैया ने कहा लखु गोविंद राधे।
6कान्ह है कि तेरा पति है बता दे॥ 8357॥
7लाज के मारे गोपी गोविंद राधे।
8मरि गइ बिनु ही मौत बता दे॥ 8358॥
9भाजि गइ निज घर गोविंद राधे।
10ह्वै गइ उर मालामाल बता दे॥ 8359॥
11बालकृष्ण गोपी घर गोविंद राधे।
12माखन चोरी करने गये थे बता दे॥ 8360॥
13बहू तो जानती थी गोविंद राधे।
14मन ही मन थी विभोर बता दे॥ 8361॥
15सास नाहिं जानती थी गोविंद राधे।
16उसने लगाया छ्योंक मिर्च का बता दे॥ 8362॥
17लाला को छींकें आईं गोविंद राधे।
18सास दौड़ी चोर जानि डण्डा लै बता दे॥ 8363॥
19हरि भागे मुट्ठी बाँधे गोविंद राधे।
20पीत पट छूटा भये नंगे बता दे॥ 8364॥
21माखन चुरा केभागे गोविंद राधे।
22गोपी कह आ कान्ह उर में छुपा दे॥ 8365॥
23पूछा रँगीली ने गोविंद राधे।
24अपनी सहेली श्यामा ते बता दे॥ 8366॥