Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 720
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1किन्तु वह गोपी थी गोविंद राधे।
2नई नई बहू याते पर्दा बता दे॥ 8343॥
3घर ते तो बाहर गोविंद राधे।
4सास ससुर नहिं जानें दें बता दे॥ 8344॥
5अन्तर्यामी कान्ह गोविंद राधे।
6वा घर जाने को सोचा बता दे॥ 8345॥
7भोर अँधेरे ही गोविंद राधे।
8चोरी करन गये वा घर बता दे॥ 8346॥
9गोपी घर घुसि कान्ह गोविंद राधे।
10प्रथम जले दीप को फूँकि के बुझा दे॥ 8347॥
11छींके को ऊँचा लखि गोविंद राधे।
12कान्ह योगमाया ते तनु को बढ़ा दे॥ 8348॥
13पुनि छींके ते लै गोविंद राधे।
14माखन मटुकी भू पै धरा दे॥ 8349॥
15इत उत झाँके भी गोविंद राधे।
16खाये नवनि दोउ कर ते बता दे॥ 8350॥
17इतने में आयी गोपी गोविंद राधे।
18मन में विभोर बाहर क्रोध बता दे॥ 8351॥
19गोपी झपटि पुनि गोविंद राधे।
20पकर कान्ह दोउ कर को बता दे॥ 8352॥
21पुनि कान्ह संग लै गोविंद राधे।
22गइ यशुमति घर मार्ग में डरा दे॥ 8353॥
23गोपी क ह लखु मैया गोविंद राधे।
24माखन को मुख में दाग बता दे॥ 8354॥