Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 715
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1पूछा सखी ने सखि गोविंद राधे।
2यमुना तट का देखा बता दे॥ 8283॥
3चन्द्रकला बोली गोविंद राधे।
4वहाँ देखा मैंने लाल बता दे॥ 8284॥
5लाल प्रति रोम ही ते गोविंद राधे।
6रस ही रस था चूता बता दे॥ 8285॥
7मैं तो ठगी सी बस गोविंद राधे।
8देखती रही सुधि भूली बता दे॥ 8286॥
9जब तनु सुधि आई गोविंद राधे।
10तब भरा घट को जल ते बता दे॥ 8287॥
11चन्द्रकला मुख गोविंद राधे।
12सुना मंजु ने छवि मोहिनी बता दे॥ 8288॥
13मंजु केमन में भी गोविंद राधे।
14जागी लालसा लखन की बता दे॥ 8289॥
15घर पै आते ही गोविंद राधे।
16मंजु ने उठाई सिर गागरी बता दे॥ 8290॥
17पानी भरन मिस गोविंद राधे।
18गइ भाजी यमुना के तट पै बता दे॥ 8291॥
19मंजु की मंजु छवि गोविंद राधे।
20लखि भये मोहन मुग्ध बता दे॥ 8292॥
21मंजु के आगे आके गोविंद राधे।
22लाल भये खरे पूछा मंजु ते बता दे॥ 8293॥
23कहाँ ते आई है गोविंद राधे।
24कहाँ को जाय रही है तू बता दे॥ 8294॥