Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 714
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1दोनों सखियों ने गोविंद राधे।
2वृन्दा को कर पकर्यो बता दे॥ 8271॥
3वीर तू हमको भी गोविंद राधे।
4लै चलु सोई कुंज बता दे॥ 8272॥
5हम तेरे गुन गोविंद राधे।
6भूलेंगी नाँय कबहूँ बता दे॥ 8273॥
7वृन्दा ले गई गोविंद राधे।
8जहाँ खरे दोऊ गलबहियाँ दे॥ 8274॥
9देखि के चन्द्रकला गोविंद राधे।
10आपु बिकी बिनु दाम बता दे॥ 8275॥
11श्यामा गइँ सखि संग गोविंद राधे।
12श्याम गये संग सखन बता दे॥ 8276॥
13चन्द्रकला भी गई गोविंद राधे।
14जैसे तैसे निज भवन बता दे॥ 8277॥
15चन्द्रकला की दशा गोविंद राधे।
16देखी विचित्र सखी मंजु ने बता दे॥ 8278॥
17अरी री चन्द्रकला गोविंद राधे।
18तो को भयो है कहा नेकु बता दे॥ 8279॥
19चन्द्रकला बोली गोविंद राधे।
20कहा बताऊँ वीर तोसों बता दे॥ 8280॥
21गई थी यमुन तट गोविंद राधे।
22जाने का जादू भयो मो पै बता दे॥ 8281॥
23जैसे तैसे घर आई गोविंद राधे।
24चलना कठिन हुआ मेरा बता दे॥ 8282॥