Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 713
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1पुनि कह्यो हौं ही गोविंद राधे।
2तेरो हौं साँचो प्रियतम बता दे॥ 8259॥
3पुनि मिली चित्रा भी गोविंद राधे।
4वाको बतायो सब हाल बता दे॥ 8260॥
5चित्रा बोली सखि गोविंद राधे।
6यह कोऊ नई बात ना बता दे॥ 8261॥
7लँगर तो सब ते ही गोविंद राधे।
8ऐसो ही अटक्यो करे है बता दे॥ 8262॥
9एक दिन मोको हूँ गोविंद राधे।
10देखिवो चाहो लँगर बता दे॥ 8263॥
11मैं घूँघट पट गोविंद राधे।
12मुख को छुपाय आई भवन बता दे॥ 8264॥
13बोली चन्द्रकला गोविंद राधे।
14बड़ो ऊधमी नन्दलाल है बता दे॥ 8265॥
15हौं तो वाको कभू गोविंद राधे।
16नामहूँ न सुनना चाहूँ बता दे॥ 8266॥
17ऐसा न बोल सखि गोविंद राधे।
18वाको लखि कौन बिकी ना बता दे॥ 8267॥
19लँगर की मुसकनि गोविंद राधे।
20चलनि चितवनि मन मोहे बता दे॥ 8268॥
21इतने में वृन्दा तहँ गोविंद राधे।
22आई औचक पास बता दे॥ 8269॥
23वृन्दा ने कहा कुंज गोविंद राधे।
24देखा प्रिया प्रियतम को बता दे॥ 8270॥