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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 711

Reading 209 of 452 · Source nos. 8235–8246 · Source PDF 214

1कृष्ण की योगमाया गोविंद राधे।

2गोपी का भगवत्ता ज्ञान भुला दे॥ 8235॥

3कृष्ण की योगमाया गोविंद राधे।

4कृष्ण की भी निज भगवत्ता भुला दे॥ 8236॥

5कृष्ण मानें गोपी पिय गोविंद राधे।

6गोपी माने आपु कृष्ण प्यारी बता दे॥ 8237॥

7मायावृत के समक्ष गोविंद राधे।

8कृष्ण रहें योगमायावृत ही बता दे॥ 8238॥

9किन्तु ब्रज गोपी संग गोविंद राधे।

10कृष्ण योगमाया उपाश्रित बता दे॥ 8239॥

11भाव यह गोपी संग गोविंद राधे।

12योगमाया का निज पर्दा हटा दे॥ 8240॥

13सर्वशक्तिमान को भी गोविंद राधे।

14गोपियों का भोला भाला प्यार हरा दे॥ 8241॥

15योगीराज शिव को भी गोविंद राधे।

16गोपी प्रेम ब्रज में शिवानी बना दे॥ 8242॥

17ब्रह्म पाछे भागे योगी गोविंद राधे।

18गोपी के पाछे ब्रह्म योगी को बता दे॥ 8243॥

19घट फोरि लर तोरी गोविंद राधे।

20मन करे तोहिं पति ते पिटवा दे॥ 8244॥

21बार बार छेड़े मोहिं गोविंद राधे।

22मन करे कंस कारागार पठा दे॥ 8245॥

23सैन मारे काहे कारे गोविंद राधे।

24मन करे मैया ते ऊखल बँधा दे॥ 8246॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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