Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 710
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1श्याम जनि देखो कोऊ गोविंद राधे।
2जित देखो तित श्याम श्याम ही दिखा दे॥ 8223॥
3श्याम जनि देखो कोऊ गोविंद राधे।
4जग देखने ते वंचित करवा दे॥ 8224॥
5श्याम को न देखो कोऊ गोविंद राधे।
6प्यास मिटे ना, प्यास और बढ़ा दे॥ 8225॥
7श्याम को न देखो कोऊ गोविंद राधे।
8आँख वाले को भी वह अन्धा बना दे॥ 8226॥
9योगी बुलावें ब्रह्म गोविंद राधे।
10गोपी कहे कैसेहुँ श्याम को भुला दे॥ 8227॥
11योगी लगावें मन गोविंद राधे।
12गोपी हटावे मन मन ध्यान ना दे॥ 8228॥
13गोपी का ध्यान लखि गोविंद राधे।
14नारद ने पूछा ध्यान किसका बता दे॥ 8229॥
15गोपी ने उत्तर दिया गोविंद राधे।
16मन ते कहूँ उस कारे को भुला दे॥ 8230॥
17ज्यों ज्यों भुलाना चाहूँ गोविंद राधे।
18त्यों त्यों और सुधि आवे बता दे॥ 8231॥
19गोपी पूछे दुर्वासा ते गोविंद राधे।
20श्याम को भुला दूँ ऐसी साधना बता दे॥ 8232॥
21मोरपंख पीताम्बर गोविंद राधे।
22जब जब देखूँ मेरे जी को जला दे॥ 8233॥
23गोपी जाने ब्रह्म कृष्ण गोविंद राधे।
24माने प्रियतम योगमाया भुला दे॥ 8234॥