Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 708
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1“अदृष्टमव्यवहार्य” गोविंद राधे।
2आदि श्रुति वाक्य हैं मानिनी बता दे॥ 8199॥
3“सत्यं ज्ञानमनंतं” गोविंद राधे।
4इति श्रुति है गोपी मुग्धा बता दे॥ 8200॥
5श्रुतियाँ अनन्यपरा गोविंद राधे।
6सबकी सब हैं अनूढ़ा बता दे॥ 8201॥
7श्रुति जो अन्यपरा गोविंद राधे।
8वे सबकी सब ऊढ़ा बता दे॥ 8202॥
9गोपियाँ जो ऊढ़ा थीं गोविंद राधे।
10जार बुद्धि ते ही गईं शरण बता दे॥ 8203॥
11ब्रज गोपी कल्पलता गोविंद राधे।
12कृष्ण कल्पवृक्ष लता लिपटी बता दे॥ 8204॥
13गोपीजनजीवन गोविंद राधे।
14मुरली मनोहर कृष्ण हैं बता दे॥ 8205॥
15मिट्टी के बिना ज्यों गोविंद राधे।
16घड़े का अस्तित्व नहीं है बता दे॥ 8206॥
17जल के बिना ज्यों गोविंद राधे।
18तरंग अस्तित्व नहीं है बता दे॥ 8207॥
19कृष्ण बिनु गोपियों का गोविंद राधे।
20ऐसे ही अस्तित्व नहीं है बता दे॥ 8208॥
21जग की वस्तु सब गोविंद राधे।
22निज कारण में स्थित हैं बता दे॥ 8209॥
23उस कारण के भी गोविंद राधे।
24कारण हैं श्रीकृष्ण बता दे॥ 8210॥