Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 706
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1मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
2सुने सोइ जो हो अधिकारी बता दे॥ 8175॥
3मुरली की धुनि ऐेसी गोविंद राधे।
4चराचर मन को चुरा ले बता दे॥ 8176॥
5ब्रज गोपियों ने उसे गोविंद राधे।
6सुना गुनगान लगीं करने बता दे॥ 8177॥
7गुण गाते गाते ही गोविंद राधे।
8गोपियाँ तन्मय हो गयीं बता दे॥ 8178॥
9वृन्दावन में तो गोविंद राधे।
10जब कृष्ण मुरली बजावें बता दे॥ 8179॥
11मोर मतवाले होके गोविंद राधे।
12मुरली की तान पै नाचें बता दे॥ 8180॥
13पर्वत चोटियों पै गोविंद राधे।
14पशु पक्षी मूर्ति बनि जायें बता दे॥ 8181॥
15गायें भी कानों का गोविंद राधे।
16दोना बना के पियें मूर्ति ज्यों बता दे॥ 8182॥
17मूढ़ हिरनियाँ भी गोविंद राधे।
18भागी चली आवें हरि पास बता दे॥ 8183॥
19हिरनी की कौन कहे गोविंद राधे।
20स्वर्ग देवियों की सुधि भूले बता दे॥ 8184॥
21देवियाँ विमानों में गोविंद राधे।
22धुनि सुनि मूर्छित होवें बता दे॥ 8185॥
23धुनि स्वर्ग देवियों की गोविंद राधे।
24कृष्ण मिलन व्याकुलता बढ़ा दे॥ 8186॥