Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 705
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1मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
2गैयन का घास चरना भुला दे॥ 8163॥
3मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
4बछरन दूध पीना बन्द करा दे॥ 8164॥
5मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
6पशु पक्षी नेत्र प्रेमाश्रु बहा दे॥ 8165॥
7मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
8लतन तरुन रोमांच करा दे॥ 8166॥
9मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
10गोपियों को वंशीधर पास बुला दे॥ 8167॥
11गंगा का प्रवाह सीधा गोविंद राधे।
12मुरली प्रवाह उलटी गंगा बहा दे॥ 8168॥
13मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
14पति, सुत संश्लेष सुख को भुला दे॥ 8169॥
15मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
16चर जीवों को अचर बना दे॥ 8170॥
17मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
18जड़ जीवों को भी चर सा बना दे॥ 8171॥
19मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
20ब्रह्मा का वेदपाठ बंद करा दे॥ 8172॥
21मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
22जो भी सुने जग ते बहरा बना दे॥ 8173॥
23मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
24गोपियों का खाना पीना बन्द करा दे॥ 8174॥