Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 704
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1मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
2जो भी सुने कहे बार बार सुना दे॥ 8151॥
3मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
4नारद शारद की भी वीणा गिरा दे॥ 8152॥
5मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
6ब्रह्मलीन को भी समाधि ते जगा दे॥ 8153॥
7मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
8परमहंस शब्द पाछे श्री भी लगा दे॥ 8154॥
9मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
10गोपीजन गृहकार्य बंद करा दे॥ 8155॥
11मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
12लोक धर्म वेद धर्म धूलि में मिला दे॥ 8156॥
13मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
14गोपियों की लज्जा भय दूर भगा दे॥ 8157॥
15मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
16गोपियों का सारा ज्ञान लुप्त करा दे॥ 8158॥
17मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
18सोते जागते सदा ही कान में सुना दे॥ 8159॥
19मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
20लक्ष्मीजनों का पातिव्रत्य मिटा दे॥ 8160॥
21मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
22शिव की भी ब्रह्म समाधि भुला दे॥ 8161॥
23मुरली मधुर धुनि गोविंद राधे।
24शुक सनकादिक ध्यान गमा दे॥ 8162॥