Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 703
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1मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
2खीझि राधारानी निज महल छुपा दे॥ 8139॥
3मुरली जुलुम करे गोविंद राधे।
4मेरा मन करे यामें आग लगा दे॥ 8140॥
5मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
6बूढ़ी बहू बेटी कान रुई लगवा दे॥ 8141॥
7मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
8बूढ़ी कहे भगवान बहरी बना दे॥ 8142॥
9मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
10जो भी सुने कहे जादूगर को दिखा दे॥ 8143॥
11मुरली में जादू नाहिं गोविंद राधे।
12श्याम मुख जादू मुख पट्टी बँधा दे॥ 8144॥
13मुख पट्टी काहे बाँधो गोविंद राधे।
14श्याम बिनु मुख के भी मुरली बजा दे॥ 8145॥
15मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
16निर्विकल्प को सविकल्प बना दे॥ 8146॥
17मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
18सोऽहं मत वालों को दासोऽहं बना दे॥ 8147॥
19मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
20जिसने भी सुना गया काम ते बता दे॥ 8148॥
21मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
22हरि रमा हर उमा प्यार भुला दे॥ 8149॥
23मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
24बड़ों बड़ों को धराशायी बना दे॥ 8150॥