Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 702
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1वाते नात जोरो जनि गोविंद राधे।
2लोक वेद कुल धर्म सब ही नसा दे॥ 8130॥
3घूर घूर देखो जनि गोविंद राधे।
4भर्ता तेरे मन का भर्ता बना दे॥ 8131॥
5बिनु देखे जादूगर गोविंद राधे।
6मुरली सुना के उर आग लगा दे॥ 8132॥
7मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
8विधि हरि हर हाल खस्ता बना दे॥ 8133॥
9मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
10भगवान भव कैलाश भुला दे॥ 8134॥
11मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
12ब्रह्माणी रुद्राणी पति को भुला दें॥ 8135॥
13मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
14चूल्हे की लकरी भी गीली बना दे॥ 8136॥
15मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
16गोपियों के तवे की रोटी जला दे॥ 8137॥
17मुरली में जादू ऐसा गोविंद राधे।
18राधारानी भी सुधि बुधि बिसरा दे॥ 8138॥