Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 701
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1जाने कैसा जादूगर गोविंद राधे।
2श्याम देखते ही उर आग लगा दे॥ 8118॥
3जाको देखे जादूगर गोविंद राधे।
4श्याम वाके अगनित पाप जला दे॥ 8119॥
5जिसने भी देखा वाकोे गोविंद राधे।
6इहलोक परलोक दोनों गमा दे॥ 8120॥
7एक बार देखे वाको गोविंद राधे।
8बार बार देखने का रोग लगा दे॥ 8121॥
9इकटक देखो जनि गोविंद राधे।
10अन्यथा लँगर नैन सैन को चला दे॥ 8122॥
11देखो तो ऐसा देखो गोविंद राधे।
12एक बार देखि पुनि दृष्टि को हटा दे॥ 8123॥
13आँख बचा के चोर गोविंद राधे।
14करें चौर्य कर्म सारे जग में बता दे॥ 8124॥
15आँख मिला के कृष्ण गोविंद राधे।
16करे चौर्य कर्म दिन दहाड़े बता दे॥ 8125॥
17देखने में भोला भाला गोविंद राधे।
18किन्तु देखते ही सुधि बुधि बिसरा दे॥ 8126॥
19काला काला इसलिए गोविंद राधे।
20नजर न लागे आपु नजर लगा दे॥ 8127॥
21जाने कैसा जादू किया गोविंद राधे।
22जित देखुँ तित मन सोइ छवि ला दे॥ 8128॥
23एक बार देखा छवि गोविंद राधे।
24नेकु नींद लागे छवि आके जगा दे॥ 8129॥